कहानी IAS अधिकारी की-जहां चाह वहां राह

एक IAS अधिकारी ने अपनी लगन और इच्छाशक्ति से एक जर्जर इमारत को आदिवासी विद्यार्थियों के लिए ट्रेनिंग सेंटर बना दिया। ट्रेनिंग सेंटर वह भी बेहतरीन और इलाका सुनकर आप थोड़ा सा और चौंक जाएंगे । गढ़चिरौली जी हां , नक्सल प्रभावित गढ़चिरौली।

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गढ़चिरौली जिले के भामरागढ़ कस्बे में पहुंचे IAS अधिकारी मनुज जिंदल ने तहसीलदार बिल्डिंग को देखा जो काफी पुरानी थी और बुरी तरह से जर्जर हो चुकी थी।

मनुज जिंदल उस इलाके में आदिवासी स्टूडेंट्स के लिए कुछ करना चाहते थे और अचानक उनके मन में ख्याल आया कि क्यों न इसी बिल्डिंग में ट्राइबल स्टूडेंट्स के लिए एक ट्रेनिंग सेन्टर बना दिया जाए।

फिर क्या काम शुरू हो गया , इस जर्जर बिल्डिंग को नया रूप रंग दिया जाने लगा। मजबूत बनाया जाने लगा और देखते देखते 3 महीने से भी कम समय में इस पुरानी और जर्जर बिल्डिंग का नक्शा ही बदल गया।

अब यहां एक ट्रेनिंग सेंटर चल रहा है जहां ट्राइबल यानि आदिवासी विद्यार्थियों को आर्ट एंड क्राफ्ट की ट्रेनिंग दी जा रही है। फिलहाल यहां 36 PV ट्राइबल ग्रुप के विद्यार्थियों को कला और शिल्पकारी की ट्रेनिंग दी जा रही है।

इस ट्रेनिंग से इन युवाओं को भविष्य में रोजगार का लाभ तो मिलेगा ही लेकिन साथ ही इस तरह के प्रयासों से युवाओं को देश की मुख्यधारा से जोड़ने में भी काफी मदद मिलेगी और शायद इस तरीके से हम देश के कुछ इलाकों में अंतिम सांस ले रहे नक्सलवाद को भी पूरी तरह से खत्म कर पाएंगे।

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इसलिए मनुज जिंदल बधाई के पात्र है। सही मायनों में मनुज जिंदल जैसे युवा अधिकारी इस देश का भाग्य बदल सकते हैं।

इसलिए इस युवा IAS अधिकारी को एक सलाम तो बनता है।